
मुल्होए — बर्फ़ जैसा ठंडा कोरियन सीफूड सूप
विषय-सूची
16 आइटम
गर्मी शुरू होते ही याद आता है — मुल्होए
आजकल दोपहर को इतनी गर्मी पड़ रही है कि हाफ़ स्लीव में भी पसीना छूटता है। हर साल इसी मौसम में एक डिश की बेतहाशा याद आती है — मुल्होए। ताज़ी कच्ची मछली को तीखे-खट्टे सॉस में मिलाकर ऊपर से बर्फ़ जैसा ठंडा शोरबा डाला जाता है, और जब बर्फ़ के टुकड़े तैरते हुए आते हैं तो पहले चम्मच में ही गर्मी ग़ायब हो जाती है। ये बात असल में काफ़ी पुरानी है — शायद दस साल से भी ज़्यादा पहले की। गर्मियों की शुरुआत में दोस्त के साथ दैजन शहर के शिनतानजिन इलाक़े (कोरिया का एक छोटा शहर, सियोल से क़रीब दो घंटे दक्षिण में) में जो मुल्होए खाया था, वो आज तक नहीं भूला। आज उसी की बात करता हूँ।
मुल्होए आने से पहले — साइड डिशेज़

मुल्होए आने से पहले साइड डिशेज़ आ गईं। पहली चीज़ थी क्रीम सॉस में बनी सीपियों की स्टीम। सफ़ेद प्लेट में ढेर सारी छोटी सीपियाँ (बाजीराक — कोरिया में बहुत मिलने वाली क्लैम) भरी हुई थीं और ऊपर गाढ़ा क्रीम सॉस बह रहा था। मुल्होए की दुकान में ये आएगा, सोचा नहीं था। दोस्त ने बिना कुछ कहे एक उठाकर छीलना शुरू किया और "ये तो मस्त है" कहते हुए अकेले ही सफ़ाया करता रहा।

दासुल्गी नाम के छोटे-छोटे मीठे पानी के घोंघे भी आए — सूखी लाल मिर्च के साथ पकाए हुए, नमकीन और हल्के तीखे। टूथपिक से अंदर का मांस निकालकर खाना होता है और हाथ अपने आप बार-बार जाता रहा। बस मात्रा थोड़ी कम थी — एक प्लेट झट से ख़त्म हो गई और मुल्होए आने तक कुछ करने को बचा ही नहीं।
आख़िरकार आया मुल्होए — पहली नज़र

आख़िरकार मुल्होए सामने आ गया। पारदर्शी काँच के बड़े कटोरे में बारीक कटी गाजर, खीरा, लाल पत्तागोभी, नाशपाती, कएन्निप (पेरिला पत्ती), और पत्तागोभी चारों तरफ़ सजी हुई थीं। बीच में मुल्होए की असल सामग्री — तीखे सॉस में लिपटे सीफूड और कच्ची मछली के टुकड़ों पर तिल बिखरे हुए थे। रंगों का ऐसा तमाशा था कि चॉपस्टिक उठाने से पहले काफ़ी देर बस देखता रहा। इसमें ठंडा शोरबा डालकर मिलाना होता है — वो कैसे, आगे बताऊँगा।
मुल्होए क्या होता है?
मुल्होए क्या होता है?
कोरियन स्टाइल बर्फ़ीला सीफूड सूप
बेस — ताज़ी कच्ची मछली
ग्वांगओ (हैलिबट) या उरोक (रॉकफ़िश) जैसी सफ़ेद मछली को पतला काटकर 'चोगोचुजांग' नाम की चटनी (गोचुजांग यानी कोरियन लाल मिर्च पेस्ट में सिरका मिलाकर बनती है) में मिलाया जाता है। साथ में समुद्री खीरा (हैसम) या मेंग्गे (सी स्क्वर्ट) जैसे सीफूड भी डाले जाते हैं।
सब्ज़ियाँ — रंग-बिरंगी गार्निश
खीरा, गाजर, पत्तागोभी, लाल पत्तागोभी, पेरिला पत्ती, नाशपाती जैसी सब्ज़ियाँ और फल बारीक काटकर कटोरे के किनारों पर सजाई जाती हैं। कुरकुरा टेक्सचर कच्ची मछली के साथ मिलकर हर कौर को अलग बनाता है।
शोरबा — बर्फ़ जैसा ठंडा
सूखी मछली और केल्प (समुद्री शैवाल) से बना ठंडा शोरबा डालकर पूरा किया जाता है। कई जगह बर्फ़ के टुकड़े तैराकर देते हैं — गर्मी में मुल्होए की तलाश इसी ठंडक की वजह से होती है।
खाने का तरीक़ा — मिलाओ और सुड़को
चावल या सोमयन (बारीक गेहूँ के नूडल्स) डालकर मसाले समेत अच्छे से मिलाओ और चम्मच से खाओ। शोरबे की आख़िरी बूँद तक ख़त्म करना ही असली तरीक़ा है।
गर्मी शुरू होते ही कोरियाई लोग सबसे पहले जिस मौसमी खाने की तलाश करते हैं
मुल्होए का सीफूड — समुद्री खीरा, मेंग्गे, सीपी

थोड़ा और क़रीब से फ़ोटो खींची। बीच में जो काला गट्ठा दिख रहा है वो समुद्री खीरा (हैसम / सी कुकम्बर) है — मुलायम-मुलायम, लिज़लिज़ा टेक्सचर जो लोगों को या तो बहुत पसंद आता है या बिलकुल नहीं। उसके बग़ल में जो नारंगी रंग का मसाले में लिपटा है वो मेंग्गे (सी स्क्वर्ट) है — मुँह में रखते ही समंदर की तेज़ ख़ुशबू फैल जाती है, पहली बार खाने वाले चौंक ही जाते हैं। मेरा दोस्त बिलकुल ऐसा ही था। ज़िंदगी में पहली बार मेंग्गे खाया, एक टुकड़ा मुँह में डाला, आँखें गोल-गोल हो गईं और बोला "ये क्या स्वाद है भाई!" मैंने पूछा अच्छा लगा या बुरा, तो बोला "...दोनों।" सीपी का मांस पतला कटा हुआ मसाले के बीच छुपा था — चबाने पर चिउई और हल्की मिठास आती थी, तीनों में सबसे सेफ़ चॉइस यही था। समुद्री खीरा, मेंग्गे, और सीपी — ये तीनों सब्ज़ियों के बीच-बीच में धँसे हुए थे, तो हर चम्मच में क्या निकलेगा ये सस्पेंस बना रहता था।
शंख और नाशपाती

ये शंख (सोरा) को पतला स्लाइस किया हुआ है। गोल कटे हुए टुकड़ों पर काली किनारी साफ़ दिख रही थी — शंख की ख़ास पहचान। चबाने पर ज़बरदस्त चिउई टेक्सचर मिलता है और गहरा नटी स्वाद काफ़ी देर तक टिकता है। बग़ल में पीले रंग की बारीक कटी नाशपाती थी — कुरकुरी और मीठी, तीखे मसाले के साथ मिलाकर खाओ तो मुँह एकदम फ़्रेश हो जाता है। मुल्होए में फल? पहले तो अजीब लगा, लेकिन एक बार मिलाकर खाया तो लगा कि इसके बिना तो कुछ कमी रह जाएगी।
मेंग्गे और समुद्री खीरा — पसंद-नापसंद बाँटने वाली सामग्री


बीच वाले हिस्से का क्लोज़अप लिया। नारंगी रंग का उबड़-खाबड़ मेंग्गे और काला चिकना समुद्री खीरा — ऊपर सफ़ेद तिल बिखरे होने से देखने में तो ठीक-ठाक लग रहा था। लेकिन सच कहूँ तो पहली बार देखने वाले के लिए ये नज़ारा थोड़ा हैरान करने वाला ज़रूर है। दोस्त ने भी पहले "ये खाने की चीज़ है सच में?" ही पूछा था।
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मेंग्गे (सी स्क्वर्ट)
समंदर का अनानास कहलाने वाला जीव
शक्ल-सूरत
बाहर से उबड़-खाबड़ नारंगी खोल से ढका होता है, अंदर का गूदा निकालकर खाया जाता है। मुल्होए में मसाले में मिलाकर परोसा जाता है।
स्वाद
पहले कौर में ही समंदर की ख़ुशबू पूरे मुँह में फैल जाती है। मीठा-सा लगता है लेकिन पीछे हल्की कड़वाहट वाला अनोखा उमामी आता है। पसंद आया तो आदत बन जाएगी, नहीं आया तो चॉपस्टिक भी नहीं उठाओगे।
टेक्सचर
नरम और हल्का लिज़लिज़ा। चबाने से ज़्यादा ज़बान पर घुलने जैसा अहसास होता है।
पसंद-नापसंद इंडेक्स
★★★★★ एकदम दो खेमे
कोरियाई लोगों में भी इसे लेकर राय पूरी तरह बँटी रहती है।
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हैसम (समुद्री खीरा)
समंदर का जिनसेंग कहलाने वाला जीव
शक्ल-सूरत
काली चिकनी सतह पर छोटे-छोटे दानेदार उभार होते हैं। मुल्होए में एक कौर के टुकड़ों में काटकर डाला जाता है।
स्वाद
सच कहूँ तो अपना स्वाद लगभग ज़ीरो होता है। सादा इतना कि फ़ीका कहो, लेकिन मसाले के साथ खाओ तो मसाले का पूरा स्वाद सोख लेता है।
टेक्सचर
यही इसकी जान है। चिपचिपा और लिज़लिज़ा — किसी और चीज़ से तुलना मुश्किल है। अच्छे शब्दों में कहो तो "यूनिक", बुरे में कहो तो कुछ लोग "घिनौना" भी बोलते हैं।
पसंद-नापसंद इंडेक्स
★★★★☆ टेक्सचर ही फ़ैसला करता है
स्वाद से ज़्यादा टेक्सचर पर बँटते हैं लोग। जो नहीं खा पाते उनकी वजह अक्सर वही लिज़लिज़ापन होता है।
मुल्होए की सब्ज़ियाँ — पेरिला पत्ती, पत्तागोभी, गाजर, फल तक
कएन्निप (पेरिला पत्ती) — विदेशियों के लिए मुश्किल कोरियन सब्ज़ी

पेरिला की पत्तियाँ (कएन्निप) बारीक काटकर एक तरफ़ ढेर लगाकर रखी थीं। कोरियाई लोगों के लिए ये बेहद आम सब्ज़ी है — गोश्त के साथ रैप बनाकर खाओ, साइड डिश में आए, मुल्होए में भी ज़रूरी। लेकिन ये सबको पसंद नहीं आती। कोरियाई लोग इसे ख़ुशबूदार मानते हैं, मगर बाहर के लोगों को इसकी तेज़ हर्बल गंध पहली बार में अजीब लग सकती है। बाद में जब मेरी वाइफ़ पहली बार कोरिया आई थी तो पेरिला सूँघकर बोली "ये कोई जड़ी-बूटी है क्या?" और प्लेट के कोने में सरका दिया था। अब हाल ये है कि पेरिला न मिले तो शिकायत करती है — उसका कहना है कि आदत पड़ने में छह महीने लगे। मुल्होए में ये पेरिला की ख़ुशबू तीखे मसाले के साथ मिलकर सीफूड की बिरबिराहट को दबाने का काम करती है। इसलिए निकालकर खाओ तो स्वाद एकदम बदल जाता है।
पत्तागोभी और गाजर

पत्तागोभी और गाजर के बारे में अलग से क्या बताना। बारीक़ लच्छे काटकर रखे थे — मिलाकर खाते वक़्त कुरकुरा टेक्सचर जोड़ने का काम करते हैं। ये दोनों न हों तो सिर्फ़ सीफूड और मसाला बचेगा जिससे जल्दी उकता जाओगे, लेकिन बीच-बीच में कुछ कुरकुरा चबाने को मिलता रहे तो पूरा कटोरा बिना बोर हुए ख़त्म हो जाता है।
सेब और खीरा

सेब भी माचिस की तीली जैसा बारीक काटकर डाला था। पहले से नाशपाती भी थी और अब सेब भी आ गया तो मिठास काफ़ी बढ़ गई। तीखे मसाले के बीच-बीच में फल की ठंडी मिठास ऊपर उठती है — मुँह को बार-बार रीसेट कर देती है। पीछे हल्के हरे रंग का जो बारीक कटा दिख रहा है वो खीरा है — कुरकुरापन का ज़िम्मेदार यही है। मुल्होए में इतनी सब्ज़ियाँ और फल जाते हैं, पहले पता नहीं था, लेकिन खाकर देखो तो हर चीज़ अपना रोल निभा रही होती है।
लाल पत्तागोभी और प्याज़

लाल पत्तागोभी और प्याज़ भी बारीक काटकर एक कोना भरे हुए थे। लाल पत्तागोभी का बैंगनी रंग इतना चटक था कि पूरे मुल्होए की रंगत निखार रहा था। प्याज़ सफ़ेद लच्छों में बग़ल में रखा था — मिलाकर खाओ तो वो तीखी चरमराहट आती है जो मसाले के साथ बहुत अच्छी जमती है।
मुल्होए खाने का तरीक़ा — शोरबा डालो और मिलाओ

अब दिखाता हूँ मुल्होए खाने का तरीक़ा। ठंडा शोरबा लबालब डाला और ज़ोर से मिला दिया। अभी तक जो ख़ूबसूरती से सजा हुआ था वो ग़ायब — तीखे लाल शोरबे में सब्ज़ियाँ और सीफूड एक-दूसरे में उलझकर बिलकुल अलग खाना बन गया। सच कहूँ तो देखने में मिलाने से पहले कहीं बेहतर था, लेकिन स्वाद इसी हालत में असली है। चम्मच से एक बड़ा कौर उठाओ तो समुद्री खीरा, मेंग्गे, सेब, पेरिला पत्ती सब एक साथ आते हैं और मुँह में मिलकर तीखा-ठंडा स्वाद धमाके से फटता है। दोस्त ने मुझे मिलाते देखकर कहा "अभी जो इतना सुंदर था वो क्या कर दिया" — मैंने बोला ऐसे ही खाते हैं, तो थोड़ा अफ़सोस करता रहा।

करछी से तले तक पहुँचकर उलट-पलट किया। मसाला नीचे बैठ जाता है इसलिए सिर्फ़ ऊपर-ऊपर मिलाने से काम नहीं चलता। कई बार पलटने के बाद गाजर, सेब, पेरिला सब लाल मसाले में लिपटकर बाहर आए — अब जाकर सही मुल्होए वाला लुक बना। हाँ, मसाला थोड़ा नमकीन ज़्यादा था। शोरबा डालने से हल्का पड़ जाता है, फिर भी पहले दो-तीन चम्मच में मुँह सुन्न कर देने वाला नमक पहले आया।
मुल्होए सोमयन — बचे शोरबे में नूडल्स का मज़ा

मुल्होए काफ़ी हद तक ख़त्म करने के बाद सोमयन — यानी सेवइयों जैसे बारीक गेहूँ के नूडल्स — अलग से ऑर्डर करके बचे हुए शोरबे में डालकर खाना कोरिया में पक्का तरीक़ा माना जाता है। प्लेट में एक कौर के गोल-गोल बंडल बनाकर दिए थे, ऊपर हल्का तिल छिड़का हुआ। इन्हें मुल्होए के शोरबे में डुबोकर मिलाओ तो वो तीखा शोरबा नूडल्स में पूरा भिंच जाता है और एक नई डिश बन जाती है। दोस्त ने तो कह दिया कि मुल्होए से ज़्यादा ये सोमयन अच्छा लगा। शोरबे में सीफूड का सारा स्वाद घुला हुआ था, इसलिए सादे मसाले वाले नूडल्स से तुलना ही नहीं थी।
सोमयन को शोरबे में डालो तो


सोमयन की मात्रा सोच से ज़्यादा थी। पहले लालच में एक साथ सारे डाल दिए और आख़िर में थोड़ा ऊब गया। आधे डालकर बाक़ी बाद में डालना बेहतर रहता, लेकिन तब ये समझ नहीं था। लाल शोरबे के ऊपर सफ़ेद नूडल्स का गोला तैरता दिख रहा है — नीचे बैठी सब्ज़ियों के टुकड़े और सीफूड भी साथ ऊपर आ रहे थे, तो लगा जैसे मुल्होए दोबारा खा रहा हूँ।
दो लोगों का ख़र्चा क़रीब ₹2,500 और वापसी का रास्ता
बाहर निकलते हुए दोस्त से पूछा कैसा लगा, बोला "मेंग्गे छोड़ दो तो सब मज़ेदार था।" यानी मेंग्गे से आख़िर तक दोस्ती नहीं हो पाई। मुझे तो उलटा वही सबसे अच्छा लगा — एक ही कटोरे में से खा रहे थे लेकिन दोनों अलग-अलग चीज़ उठा रहे थे, शायद यही मुल्होए का मज़ा है। दो लोगों का मुल्होए और सोमयन मिलाकर क़रीब ₹2,500 (लगभग 40,000 वॉन) लगे थे — इतना सीफूड देखो तो महँगा नहीं लगा। वापसी में दोनों चुप थे — पेट भरा होने की वजह से या ठंडे शोरबे की वजह से आई सुस्ती, पता नहीं। वैसे जिस दुकान में गए थे वो अब बंद हो चुकी है, लेकिन दैजन इलाक़े में मुल्होए देने वाली जगहें आज भी काफ़ी हैं — सर्च करोगे तो तुरंत मिल जाएँगी। आज भी गर्मी शुरू होती है तो उस दिन का मुल्होए याद आ जाता है।