कोरियन स्ट्रीट फूड गाइड — बाज़ार की गलियों के 20 लज़ीज़ व्यंजन (भाग 2)
सोमुन मार्केट भाग 2 — अंदरूनी गलियों का कोरियन स्ट्रीट फूड सफ़र शुरू
पहले भाग में मैंने आपको सोमुन मार्केट के प्रवेश द्वार से लेकर खाने-पीने वाली गली के बीच तक दिखाया था, लेकिन सच बताऊँ तो वो बस आधा ही था। हर गली मुड़ते ही कोई नया कोरियन स्ट्रीट फूड सामने आ जाता था और कैमरा नीचे रखना नामुमकिन था। अगर आपने अभी तक पहला भाग नहीं पढ़ा तो पहले वो पढ़ लीजिए, कहानी जुड़ी रहेगी।
पिछला लेख पढ़ें भाग 1: कोरियन स्ट्रीट फूड गाइड — बाज़ार की गलियों के 20 लज़ीज़ व्यंजन जो ख़ुद चखकर बताएइस दूसरे भाग में हानगवा गंगजोंग, ग्योंगदान स्क्यूअर, बुंगओप्पांग, किमबाप और जोकबाल तक — सोमुन मार्केट की अंदरूनी गलियों में मिलने वाले बाकी कोरियन स्ट्रीट फूड की पूरी सूची तैयार की है।
बाज़ार के अंदर जाते-जाते माहौल बदलने लगा। प्रवेश द्वार की तरफ़ पर्यटकों की भीड़ और चहल-पहल थी, लेकिन अंदर पहुँचते ही एक अलग ही दुनिया दिखी — आंटियाँ दुकानदारों से हँस-हँसकर बात करती हुईं, पुराने नियमित ग्राहकों का अपना मोहल्ला। ठेलों का रूप भी बदल गया — पहले भाग में जो कतारबद्ध कबाब-स्टिक दिखी थीं, उनकी जगह अब बिलकुल अलग तरह के पारंपरिक बाज़ार के खाने नज़र आने लगे।
हानगवा गंगजोंग — कोरियन पारंपरिक बाज़ार से ही ख़रीद सकते हैं ये तोहफ़े वाली मिठाई
बाज़ार की अंदरूनी गली में चल रही थी कि एक तरफ़ दीवार पर पारदर्शी पैकेट्स की ढेर सारी पर्तें सजी दिखीं। हानगवा गंगजोंग (Hangwa Gangjeong) — ये कोरिया की पारंपरिक मिठाई है जिसमें मेवे, तिल, सूरजमुखी के बीज जैसी चीज़ें चावल की चाशनी (जोचोंग) से जोड़कर चौकोर टुकड़ों में जमाई जाती हैं। हर किस्म अलग-अलग बड़ी टोकरियों में रखी थी — काले तिल की गंगजोंग, सूरजमुखी बीज की गंगजोंग, कद्दू के बीज की गंगजोंग, और बगल में ओरांदा नाम की फूले चावल वाली गंगजोंग भी।
ये कोई वहीं खड़े-खड़े खाने वाला स्नैक नहीं है। पैकेट में ख़रीदकर घर ले जाने वाली तोहफ़े जैसी मिठाई है। आसपास आंटियाँ कई-कई पैकेट चुन-चुनकर ले रही थीं। त्योहारों या पूजा-अनुष्ठान में इस्तेमाल होती है, और बुज़ुर्ग लोग चाय के साथ भी बड़े चाव से खाते हैं।
सीधे शब्दों में कहें तो ये "अनाज और मेवों की चिक्की" है। अगर ग्रेनोला बार का ख़याल आ रहा है तो काफ़ी क़रीब है, बस टेक्सचर बहुत ज़्यादा सख़्त होता है और चावल की चाशनी की हल्की मिठास चीनी से बिलकुल अलग क़िस्म की है।
गाजर का ताज़ा जूस — बाज़ार घूमते हुए हाथ में रखने के लिए बिलकुल सही साइज़
गंगजोंग वाले ठेले के बिलकुल बगल में बर्फ़ के पानी में डूबी नारंगी रंग की बोतलें दिखीं। 100% ताज़ा गाजर का कोल्ड-प्रेस्ड जूस (Fresh-pressed carrot juice)। रंग बहुत गहरा था, और बोतल पर गाजर के आकार का प्यारा सा कीचेन लटका हुआ था — ऐसा क्यूट डिज़ाइन कि बिना रुके आगे बढ़ना मुश्किल था। सोमुन मार्केट की गलियों में घूमते हुए हाथ में पकड़कर पीने के लिए एकदम सही साइज़ था।
तवे पर भुने आलू — बिना मसाले के बस आलू और तेल
लोहे के तवे पर मोटे-मोटे चौकोर कटे आलू तेल में सुनहरे भुने जा रहे थे। कोई मसाला नहीं, बस आलू और तेल। सादगी भरा, लेकिन जगह-जगह सुनहरी भूरी पपड़ी दिख रही थी जो बता रही थी कि स्वाद ज़बरदस्त नटी और कुरकुरा होगा। कोरिया के पारंपरिक बाज़ार में आलू को इस तरह तवे पर भूनकर बेचना बहुत आम नहीं है, इसलिए उलटे और ज़्यादा ध्यान गया।
ग्योंगदान स्क्यूअर — चिपचिपे चावल के गोले जिन पर दस से ज़्यादा टॉपिंग
शीशे की डिस्प्ले केस में हर स्टिक पर 3-4 गोल-गोल ग्योंगदान पिरोए हुए थे, किस्म के हिसाब से कतार में सजे। पहले तो मुझे लगा ये जापानी दांगो है, लेकिन कोरिया में इसे ग्योंगदान स्क्यूअर या त्तोक-क्कोची कहते हैं। चिपचिपे चावल के आटे को गोल-गोल बनाकर स्टिक पर पिरोया जाता है — ये कोरिया की पारंपरिक तोक (चावल केक) वाली मिठाई है।
और किस्में तो सच में बहुत ज़्यादा थीं। कुछ पर नाम भी नहीं लिखा था, बस रंग से पहचानो — चॉकलेट सॉस में लथपथ काली वाली, लाल बीन पेस्ट के ऊपर पीले अखरोट के टुकड़े वाली, सोय सॉस में चमकदार भूरी वाली, समुद्री शैवाल में लपेटी नमकीन वाली। उसके बगल में मात्चा के आटे में क्रीमचीज़ वाली हरी भी थी, फूले हुए चावल की पीली कोटिंग वाली भी, और गुलाबी क्रंच वाली भी दिखी — गुलाबी वाली के दाम के साइन पर "चेरी ब्लॉसम" लिखा था तो लगा ये सकुरा फ़्लेवर है। एक स्टिक ₹185 (₩3,000) की।
सच कहूँ तो एक ख़रीदकर चखना चाहिए था, अफ़सोस रह गया। बस तस्वीरें लेने में इतना व्यस्त हो गई कि ख़रीदना भूल गई। स्वाद भी चखा होता तो ये लेख और भी मज़ेदार होता। अंग्रेज़ी में इसे "Gyeongdan skewer — Korean rice ball skewer with various toppings" कह सकते हैं।
होत्तोक — तवे पर दबाकर सेंकी जाने वाली कोरियन स्ट्रीट फूड की क्लासिक डिश
पहले भाग में जो दिखाया था वो डेगू स्टाइल तली हुई होत्तोक थी, ये उससे अलग वर्ज़न है। कोरिया में सबसे आम होत्तोक ऐसे ही बनती है — तवे पर रखकर चपटा दबाकर सेंकी जाती है। पूरे कोरिया में कहीं भी मिल जाने वाली, कोरियन स्ट्रीट फूड की बेसिक में बेसिक चीज़ है ये।
तुलना करके देखें भाग 1 में बताई गई डेगू स्टाइल तली हुई होत्तोक यहाँ देखेंतली हुई होत्तोक तेल में पूरी डुबोकर बनती थी इसलिए गोल और मोटी थी, लेकिन ये तवे पर दबाई जाती है इसलिए चपटी और पतली। दुकानदार चिमटे से एक-एक पलट रहे थे, सुनहरी भूरी सतह पर तेल की चमक दमक रही थी। अंदर वही काली चीनी और मेवे भरे हैं, बस तली हुई वाली से कम तैलीय है और बाहर की परत ज़्यादा पतली और कुरकुरी।
तली हुई होत्तोक डोनट जैसी थी तो ये पैनकेक वाली तरफ़ है। अंग्रेज़ी में "Hotteok — Korean sugar-filled griddled pancake" कहते हैं। कोरिया यात्रा के दौरान सड़क किनारे जो होत्तोक मिलती है, वो ज़्यादातर यही तवे वाली होती है।
किमबाप — बाज़ार की किमबाप और दुकान की किमबाप में ज़मीन-आसमान का फ़र्क़
किमबाप के ठेले को बस यूँ ही पार करने वाली थी कि डिस्प्ले देखकर पाँव रुक गए। दस से ज़्यादा किस्में थीं और हर एक में भराव अलग। दाम वाले बोर्ड पर लिखे नाम — स्पैम किमबाप, सब्ज़ी किमबाप तो बेसिक हैं, उसके अलावा दोनकात्सु (कटलेट) किमबाप, सोय सॉस बुलगोगी किमबाप, पूरी तली हुई झींगा बाहर झाँकती हुई झींगा किमबाप, एन्चोवी किमबाप, नूड किमबाप (बिना शैवाल वाली) तक।
ख़ासकर झींगा किमबाप — तली हुई झींगा की पूँछ किमबाप के सिरे से बाहर निकली हुई थी, विज़ुअल एकदम आकर्षक। दोनकात्सु किमबाप का कटा हुआ क्रॉस-सेक्शन देखा तो पता चला कि पूरा कटलेट अंदर लपेटा है, इसलिए सामान्य किमबाप से दोगुनी मोटी थी। दुकानदार चिमटे से एक-एक उठाकर प्लेट में परोस रहे थे और लाइन काफ़ी लगी थी। कन्वीनिएंस स्टोर में भी किमबाप मिलती है, लेकिन बाज़ार की किमबाप में भराव की मात्रा ही दूसरे लेवल पर है।
किमबाप (Gimbap) पहली बार देखने वालों को अक्सर जापानी सुशी याद आती है, लेकिन ये पूरी तरह अलग खाना है। सुशी कच्ची मछली वाला सिरके का चावल है, जबकि किमबाप में समुद्री शैवाल पर चावल बिछाकर तरह-तरह की पकी हुई सामग्री भरकर रोल किया जाता है। कुछ भी कच्चा नहीं होता इसलिए सड़क पर हाथ से उठाकर खाने में आसान है, और कोरिया में पिकनिक या सैर पर जाते वक़्त ये ज़रूर साथ ले जाते हैं।
मुकबाप · उदोन · गुकसू — सोमुन मार्केट में पेट भरने वाला इंस्टेंट नूडल कॉर्नर
बाज़ार के अंदर कई ठेले बराबर-बराबर सटे हुए एक इंस्टेंट फ़ूड कॉर्नर था। ऊपर मेन्यू बोर्ड लटके थे, और मुकबाप, उदोन, गुकसू (कोरियन नूडल्स) — सब एक ही ज़ोन में जमा थे, जिससे ठीक से पेट भरना चाहने वाले लोग ख़ुद-ब-ख़ुद यहीं खिंचे चले आ रहे थे।
सजावट का तरीक़ा अनोखा था — मुकबाप में पहले से मुक और सामग्री कटोरे में रखी होती है, ऑर्डर आते ही वहीं गरम शोरबा डालकर तैयार। बगल में पतले नूडल्स और उदोन एक-एक पोर्शन प्लास्टिक में पैक करके रखे थे। नूडल्स पहले से उबालकर पैक कर दिए गए थे, बस शोरबा गरम करके डालो और परोसो — इसलिए सर्विस बहुत तेज़ थी। एक ही ठेले पर तीन-चार तरह के नूडल्स चल रहे थे।
मुक भी दो तरह का बराबर-बराबर रखा था, रंग और टेक्सचर दोनों अलग। शायद एक बलूत के स्टार्च (दोतोरीमुक) का और दूसरा कूट्टू (मेमिलमुक) का था, लेकिन नाम की तख़्ती नहीं दिखी तो पक्का नहीं कह सकती। बता दूँ कि मुक (Muk) बलूत या कूट्टू के स्टार्च को जमाकर बनाया जाने वाला जेली जैसा खाना है — ऊपर से मसालेदार सॉस डालकर खाओ तो मुलायम लिसलिसा टेक्सचर काफ़ी अच्छा लगता है।
बुंगओप्पांग — लाल बीन से लेकर क्रीम और चीज़-कॉर्न तक, बदल चुकी सर्दियों की मिठाई
मछली के आकार वाले लोहे के साँचे में पहले बैटर बिछाया, फिर ऊपर से ढेर सारा लाल बीन पेस्ट (पत्थली) डाला जा रहा था। पीछे शीशे के अंदर पहले से बनी बुंगओप्पांग का ढेर लगा था — आटे से ज़्यादा फ़िलिंग लग रही थी, इतनी भरपूर मात्रा में डाल रहे थे।
लेकिन बगल वाले साँचे में भराव अलग था। पीली कस्टर्ड क्रीम वाली भी बन रही थी, और मक्के के दाने और चीज़ के टुकड़े डाली हुई भी दिखी। आजकल की बुंगओप्पांग (Bungeoppang) सिर्फ़ लाल बीन वाला ज़माना पार कर चुकी है। क्रीम, शकरकंद, चीज़-कॉर्न जैसे नए-नए फ़्लेवर लगातार आ रहे हैं, एक ही दुकान पर दो-तीन स्वाद एक साथ बनते देखना अब आम बात है। सर्दियों में कोरिया यात्रा पर जाएँ तो ये कोरियन स्ट्रीट फूड बिलकुल मिस मत करना।
मूँगफली जोंब्योंग — दादी-नानी के घर जैसा कुरकुरा देसी बिस्कुट
मूँगफली साबुत-की-साबुत आटे में धँसी हुई, सेंकी गई मिठाई दिखी। वॉफ़ल जैसे साँचे में दबाकर बनाई गई लगती थी — चपटी प्लेट जैसी शक्ल थी और मूँगफली एक-एक करके उभरी हुई। इसे आमतौर पर मूँगफली जोंब्योंग या मूँगफली गवाजुल कहते हैं। मैदे के आटे में थोड़ी चीनी मिलाकर, ऊपर खूब सारी मूँगफली बिछाकर लोहे के तवे पर दबाकर सेंकने का तरीक़ा है। कुरकुरा चबाओ तो मूँगफली की भीनी-भीनी ख़ुशबू लगातार आती रहती है — बिलकुल पुराने ज़माने का वो देसी स्नैक वाला अहसास।
प्योन्युक — उबालकर दबाया हुआ सूअर के माँस का स्लाइस
थर्मोकोल ट्रे पर क्लिंग रैप लगाकर बेचा जा रहा था। सूअर का अगला पैर या पिंडली का हिस्सा लंबे समय तक उबालकर दबाकर जमाया जाता है, फिर पतला-पतला काटते हैं — कटी हुई सतह पर माँस और चर्बी की परतें परत-दर-परत दिखती हैं। झींगा के अचार या सरसों की सॉस में डुबोकर खाना बेसिक तरीक़ा है, शराब के साथ स्नैक के तौर पर भी बढ़िया लगता है। त्योहारों और पूजा की थाली में भी ज़रूर रखा जाता है, और बाज़ार में ऐसे पहले से बनाकर रखा हुआ ट्रे समेत उठाकर ले जाने वाले काफ़ी लोग थे।
जोकबाल — कोलेजन से भरपूर सूअर के पैर की सोय सॉस ग्रेवी
सूअर के अगले पैर को सोय सॉस के मसालेदार पानी में ख़ूब देर तक उबालकर, हड्डी निकालकर, खाने लायक़ टुकड़ों में काटा हुआ था। हड्डी नहीं थी इसलिए ट्रे में बस माँस के टुकड़े सजे थे — घर जाकर सीधे प्लेट में रखो, बस। जोकबाल (Jokbal) कोलेजन वाला हिस्सा होता है तो चबाने में चिपचिपा-लचीला टेक्सचर आता है, सॉस या झींगा के अचार में डुबोकर खाओ तो स्नैक के तौर पर भी और साइड डिश के तौर पर भी बढ़िया।
कोरिया में ये रात का नाश्ता या ऑफ़िस पार्टी के मेन्यू में बहुत पॉपुलर है। दाम वाली तख़्ती पर "족발" (जोकबाल) लिखा हल्का सा दिख रहा था।
सच कहूँ तो तस्वीरें छाँटते हुए भी यक़ीन नहीं हो रहा था कि ये सब एक ही बाज़ार से निकला है। हानगवा गंगजोंग से लेकर ग्योंगदान स्क्यूअर, बुंगओप्पांग, किमबाप, इंस्टेंट उदोन, जोकबाल तक — पहले भाग से मिलाकर देखें तो लगभग 40 तरह के कोरियन स्ट्रीट फूड डेगू के सोमुन मार्केट अकेले में दिखे।
और ये सब नहीं है। जो फ़ोटो नहीं खींच पाई वो भी हैं, जो गली बिना रुके निकल गई वो भी। सोमुन मार्केट इतना बड़ा है। लेकिन फिर से कह दूँ — कोरिया का हर पारंपरिक बाज़ार ऐसा नहीं होता। पूरे देश में गिने-चुने बड़े बाज़ारों में से है ये, तभी इतनी विविधता दिखती है। छोटे मोहल्ले के बाज़ार का माहौल बिलकुल अलग होता है।
बाज़ार का पता, खुलने-बंद होने का समय, आने-जाने का रास्ता जैसी बुनियादी जानकारी पहले भाग में पूरी लिख चुकी हूँ, अगर अभी तक नहीं पढ़ा तो पहले भाग से शुरू करें।
शुरू से पढ़ें भाग 1: कोरियन स्ट्रीट फूड गाइड — बाज़ार की गलियों के 20 लज़ीज़ व्यंजन | ख़ुद चखकर बताए कोरियन पारंपरिक बाज़ार खानायह लेख मूल रूप से https://hi-jsb.blog पर प्रकाशित हुआ था।