
कोरिया का समुद्री बारबेक्यू — शंख और सीफ़ूड ग्रिल
विषय-सूची
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बिना किसी प्लान के निकले और यहाँ पहुँच गए
कोई ख़ास प्लान नहीं था। रोज़मर्रा की ज़िंदगी से बोर हो गए थे तो मम्मी, भाई, वाइफ़ — हम चारों ने गाड़ी उठाई और गुन्सन (Gunsan) तक चले गए, जो सियोल से क़रीब 3 घंटे दक्षिण-पश्चिम में एक तटीय शहर है। असल में हम गोगुन्सन द्वीपसमूह (Gogunsan Archipelago) पर एक कैफ़े जाने वाले थे, लेकिन ठीक बग़ल में एक सीफ़ूड रेस्टोरेंट दिख गया तो अंदर घुस गए। नतीजा — उस दिन कैफ़े से ज़्यादा याद इस रेस्टोरेंट की रही।
ये पोस्ट इस रेस्टोरेंट को रिकमेंड करने के लिए नहीं है। ये बताने के लिए है कि कोरिया के समंदर किनारे जाएँ तो सीफ़ूड इस तरीक़े से खा सकते हैं। बुसान हो, इंचियोन हो, गांगनुंग हो या जेजू — बस समुद्र के पास पहुँच जाओ, ऐसे शंख-सीपी ग्रिल करने वाले रेस्टोरेंट हर जगह मिलते हैं। कोरिया में ज़िंदा सीफ़ूड को गर्म तवे पर रखकर कस्टमर ख़ुद ग्रिल करके खाता है — यही कोरियन स्टाइल सीफ़ूड बारबेक्यू है।

शंख-सीपी ग्रिल सेट — एक तवे पर क्या-क्या आया
शंख-सीपी ग्रिल सेट ऑर्डर किया तो ये सब आया। एबलोन (समुद्री घोंघा), स्कैलप (सीपी), मसल्स, झींगे और ऊपर से चादोलबागी (गाय की छाती के नीचे का पतला कटा बीफ़) भी — साथ में सोयाबीन स्प्राउट्स, इनोकी मशरूम, चाइव्स, टोफ़ू और चीज़ तक, सब्ज़ियाँ और साइड्स ठसाठस भरे हुए। कोरिया के समंदर किनारे वाले शंख ग्रिल रेस्टोरेंट में सिर्फ़ सीफ़ूड नहीं, बल्कि इस तरह बीफ़ भी सेट में साथ आता है — ऐसी जगहें काफ़ी हैं। हम 4 लोग थे और बिल क़रीब 1 लाख वॉन आया, मतलब प्रति व्यक्ति लगभग 25,000 वॉन — भारतीय रुपयों में लगभग ₹1,500 प्रति व्यक्ति। टूरिस्ट स्पॉट के हिसाब से खाना काफ़ी भरपूर था। बल्कि लग रहा था कि ये सब ख़त्म कर भी पाएँगे या नहीं।

एबलोन ग्रिल — खोल समेत पूरा भूनने का कोरियन तरीक़ा
एबलोन को उसके खोल समेत पूरा तवे पर रखकर भूनना — ये कोरियन स्टाइल है। विदेशों में भी एबलोन प्रीमियम सीफ़ूड माना जाता है, लेकिन ज़िंदा एबलोन को वहीं मौक़े पर ग्रिल करके खाने का अनुभव कोरिया के समंदर किनारे के अलावा आसानी से नहीं मिलता। खोल समेत भूनो तो अंदर रस बुदबुदाने लगता है और मांस धीरे-धीरे पकता है। जब पूरा पक जाए और उठाकर खाओ तो चबाने में चिंगमी लेकिन मुलायम, और समुद्र की ख़ुशबू पूरे मुँह में फैल जाती है।
बुसान और जेजू में भी एबलोन काफ़ी खाया है, लेकिन सच कहूँ तो एबलोन का स्वाद जगह-जगह बहुत ज़्यादा अलग नहीं लगा। उससे ज़्यादा फ़र्क़ ये पड़ता है कि समुद्र के सामने बैठकर अभी-अभी ग्रिल किया हुआ खा रहे हो — वो माहौल ही स्वाद बदल देता है।

स्कैलप — एबलोन से बिल्कुल अलग मुलायम टेक्सचर
स्कैलप भी कोरियन शंख ग्रिल का अनिवार्य हिस्सा है। तवे पर रखो तो खोल खुलने लगता है और अंदर रस बुदबुदाने लगता है — बीच में गोल-सा जो हिस्सा होता है, वो "गवांजा" (मसल) ही असली स्टार है। जब ये पक जाता है तो हल्का मीठा और बेहद स्वादिष्ट लगता है। अगर एबलोन चबाने वाला टेक्सचर है, तो स्कैलप का गवांजा मुलायम और मुँह में घुल जाने वाला है।

पास से देखो तो बड़े-बड़े झींगे भी बिछे हुए हैं, और "की-जोगे" (पंखे जैसी बड़ी सीपी) की मसल भी मोटे-मोटे टुकड़ों में कटी हुई अलग से आई। बग़ल में गोल-गोल जो दिख रहे हैं वो सीफ़ूड बॉल्स हैं। और सच कहूँ तो उस दिन सबसे ज़्यादा याद न एबलोन रहा, न स्कैलप — बल्कि ये सीफ़ूड बॉल्स रहे। बाहर से क्रिस्पी पकते हैं और अंदर से सीफ़ूड का मांस फटता है और रस एकदम भर-भर के निकलता है। मेन्यू में इनकी कोई ख़ास पहचान नहीं थी, लेकिन खाकर देखा तो ये सबसे बढ़िया निकले।
🐙 कोरिया में शंख ग्रिल पहली बार? ये जान लीजिए
कोरिया के समंदर किनारे वाले शंख ग्रिल रेस्टोरेंट में कस्टमर ख़ुद तवे पर ग्रिल करके खाता है। पहली बार हो तो थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन ज़्यादातर जगहों पर स्टाफ़ आकर आँच सेट कर देता है और क्या पहले रखना है, क्या बाद में — सब बता देता है। टेंशन लेने की कोई ज़रूरत नहीं। कोरिया में इसे सीफ़ूड बारबेक्यू की तरह एन्जॉय करते हैं।

एक तवे पर सीफ़ूड, मीट और सब्ज़ियाँ — सब कुछ
पूरा देखो तो ऐसा सेटअप है। स्कैलप, झींगे, मसल्स, चादोलबागी एक तवे पर, और उसके चारों तरफ़ सोयाबीन स्प्राउट्स और इनोकी मशरूम घेरा बनाए हुए। कोरिया के समंदर किनारे वाले शंख ग्रिल रेस्टोरेंट ज़्यादातर इसी स्टाइल में सर्व करते हैं।

स्कैलप दो तरीक़ों से खाई। एक — खोल समेत पकाई हुई, दूसरी — मसल अलग करके सीधे तवे पर ग्रिल की हुई। खोल वाली में रस अंदर जमा रहता है तो नम और मुलायम, जबकि अलग से ग्रिल की हुई का ऊपर हल्का गोल्डन हो जाता है और चबाने में ज़्यादा स्वादिष्ट और चिंगमा-सा टेक्सचर आता है। एक ही स्कैलप है लेकिन तरीक़े के हिसाब से बिल्कुल अलग डिश लगती है — ये मज़ेदार था। समुद्र की गंध से परेशान होने वाले लोग भी सीधे तवे पर ग्रिल वाली आराम से खा लेते हैं।

सीपी की मसल पर चीज़? सच में?
ये अलग से आई ट्रे थी — की-जोगे (बड़ी सीपी) की मसल मोटे-मोटे टुकड़ों में कटी हुई और उसके ऊपर ढेर सारा मोज़ेरेला चीज़। बग़ल में गोल-गोल सीफ़ूड बॉल्स हैं जिन्हें भी साथ में तवे पर रखकर ग्रिल करना होता है। कोरिया में शंख ग्रिल के साथ चीज़ डालकर खाना काफ़ी आम बात है। मसल पर चीज़ रखकर साथ में ग्रिल करो तो चीज़ पिघलते हुए सीफ़ूड के नमकीन स्वाद के साथ मिल जाता है। पहली बार सुनने में अजीब लग सकता है। लेकिन एक बार खाओगे तो तुरंत समझ आ जाएगा।

चादोलबागी और समहाप — कोरियन शंख ग्रिल का बेसिक कॉम्बो
चादोलबागी भी सेट में शामिल थी। गाय की छाती के निचले हिस्से को पतला-पतला काटा जाता है — लाल मांस के बीच-बीच में सफ़ेद चर्बी की परतें साफ़ दिखती हैं, यही इसकी पहचान है। तवे पर रखो तो पहले चर्बी पिघलती है, स्वादिष्ट तेल चारों तरफ़ फैलता है और कुछ ही सेकंड में पक जाती है। कोरिया में शंख ग्रिल के साथ चादोलबागी आना लगभग डिफ़ॉल्ट है — सीफ़ूड, मीट और सब्ज़ी तीनों को एक साथ एक बाइट में लपेटकर खाने को "समहाप" कहते हैं। यहाँ जो आया वो हान-वू (कोरियन प्रीमियम बीफ़) था, तो चर्बी का उमामी स्वाद साधारण बीफ़ से कहीं ज़्यादा गहरा था।
💰 क़ीमत का अंदाज़ा
4 लोगों के लिए क़रीब 1 लाख वॉन (प्रति व्यक्ति लगभग ₹1,500)। अंदरूनी शहरों में इतने ही पैसों में मिनी-कोर्स के साथ साशिमी तक मिल जाती है। टूरिस्ट स्पॉट की क़ीमत थोड़ी ज़्यादा ज़रूर लगी, लेकिन इतनी मात्रा और क्वालिटी देखकर पैसे बर्बाद हुए जैसा बिल्कुल नहीं लगा।

सब्ज़ियाँ और साइड्स — सेट में बेसिक में इतना कुछ
सिर्फ़ सीफ़ूड और मीट नहीं, सब्ज़ियाँ भी इस तरह एक तरफ़ ढेर लगाकर आती हैं। सोयाबीन स्प्राउट्स पहाड़ की तरह जमा हैं और बग़ल में किमची और दूसरी साइड डिशेज़ भी दिख रही हैं।

पास से देखो तो स्प्राउट्स के बग़ल में राइस पेपर पानी में भिगोया हुआ रखा है, और इनोकी मशरूम, टोफ़ू बराबर में रखे हैं। राइस पेपर पर ग्रिल्ड चादोलबागी, स्कैलप मसल और स्प्राउट्स रखकर रोल बनाकर खाना भी बढ़िया था — वियतनामी स्प्रिंग रोल जैसा फ़ील आता है, तो विदेशी लोग भी बिना किसी हिचकिचाहट के खा सकते हैं।

इनोकी मशरूम, टोफ़ू, चाइव्स भी एक पूरी प्लेट भरकर आए। ये अलग से ऑर्डर नहीं किया था — सेट में बेसिक में शामिल था। कोरिया के समंदर किनारे वाले शंख ग्रिल रेस्टोरेंट साइड्स काफ़ी दिल खोलकर देते हैं।
कोरियन रेस्टोरेंट में साइड डिशेज़ पूरी तरह फ़्री होती हैं
यहाँ एक मिनट रुककर साइड डिशेज़ की बात कर लेते हैं। कोरिया के किसी भी रेस्टोरेंट में मेन डिश ऑर्डर करो तो साथ में बान्चान (साइड डिशेज़) बेसिक में आते हैं — और ये पूरी तरह मुफ़्त होते हैं। ये कोई टिप जैसी चीज़ नहीं, कोरिया की खाने की संस्कृति ही ऐसी है। बाहर से आने वाले लोग इस बात पर काफ़ी हैरान होते हैं।

ये जांगाज्जी है। मूली या लहसुन जैसी सब्ज़ियों को सोय सॉस में मैरिनेट करके बनाते हैं — हल्का मीठा और नमकीन स्वाद होता है। मीट खाते-खाते बीच में मुँह साफ़ करने के लिए बढ़िया है।

किमची। इसे तो बताने की ज़रूरत नहीं। कोरिया के किसी भी रेस्टोरेंट में जाओ, ये हमेशा मिलेगी — बेसिक में बेसिक है ये।

ककदूगी। मूली को चौकोर काटकर लाल मिर्च पाउडर में मिलाया हुआ — किमची से ज़्यादा कुरकुरा टेक्सचर है, तो तैलीय मीट या सीफ़ूड के साथ खाओ तो मुँह एकदम फ़्रेश हो जाता है।

ये म्योंगी-नामुल है। जंगली लहसुन की पत्तियों को सोय सॉस में मैरिनेट किया हुआ — ग्रिल्ड मीट या स्कैलप मसल को इस पत्ती पर रखकर लपेटकर खाओ तो ख़ुशबूदार स्वाद आता है और तैलीय भारीपन कम हो जाता है। ये रैप वेजिटेबल (सब्ज़ी में लपेटकर खाने का पत्ता) का काम करती है।
🥬 बान्चान (Banchan) क्या है?
कोरिया में किसी भी रेस्टोरेंट में मेन डिश ऑर्डर करो तो बान्चान मुफ़्त में आता है। किमची, जांगाज्जी, ककदूगी, म्योंगी-नामुल जैसी चीज़ें — ये सिर्फ़ कोरिया की ख़ास खाने की संस्कृति है। ख़त्म हो जाएँ तो रिफ़िल भी मुफ़्त। पहली बार कोरियन रेस्टोरेंट आने वाले विदेशियों को सबसे ज़्यादा हैरानी इसी बात पर होती है।

असली ग्रिलिंग शुरू
चादोलबागी को इस तरह सोयाबीन स्प्राउट्स और चाइव्स के ऊपर रखकर भूनते हैं। पहले सब्ज़ियाँ बिछाओ, उसके ऊपर मीट रखो — सब्ज़ियों की नमी ऊपर आती है और मीट जलता नहीं, नम रहकर पकता है। जब पक जाए तो मीट और सब्ज़ी मिल-जुलकर एक चॉपस्टिक में साथ उठते हैं — और ये अलग-अलग खाने से कहीं ज़्यादा बढ़िया लगता है।

तवे पर रखना शुरू करो तो ऐसा नज़ारा होता है। एबलोन को गर्मी लगती है तो खोल के अंदर हिलने-डुलने लगता है, बग़ल में स्कैलप की मसल गोल्डन होती जा रही है, और झींगे नीले-स्लेटी रंग से धीरे-धीरे लाल हो रहे हैं। स्टाफ़ ने शुरू में आँच सेट करते हुए रखने का क्रम बताया। पहले एबलोन और स्कैलप रखो, थोड़ा पकने पर चादोलबागी बिछाओ, और आख़िर में स्प्राउट्स और चाइव्स से ढक दो। झींगे बीच-बीच में ख़ाली जगह में रख दो।

ख़ुद ग्रिल करने की प्रक्रिया ही कोरियन सीफ़ूड का असली आकर्षण
जब असल में ग्रिलिंग शुरू होती है तो तवे पर धमाल मच जाता है। चादोलबागी से तेल छन-छन निकल रहा है, स्प्राउट्स नमी सोखकर चीं-चीं की आवाज़ कर रहे हैं, झींगे तो पहले से लाल पक चुके हैं। धुआँ, आवाज़, ख़ुशबू — ये पूरी प्रक्रिया ही कोरिया के समंदर किनारे सीफ़ूड रेस्टोरेंट का सबसे बड़ा आकर्षण है मेरी नज़र में। बस बना-बनाया खाना लेकर खा लो ऐसा नहीं है — ख़ुद ग्रिल करो, पकते हुए देखो, सही टाइमिंग पर उठाकर खाओ — ये पूरी प्रक्रिया ही खाना है।

एबलोन को तवे पर गर्मी लगती है तो खोल के अंदर शरीर मरोड़ता है। ज़िंदा को सीधे पका रहे हो तो पहली बार देखने वाले थोड़ा चौंक सकते हैं। पकते-पकते खोल के किनारों से रस बुदबुदाकर बाहर आने लगता है — वो रस भी साथ में खाओ तो समुद्र का स्वाद सीधे मुँह में उतर जाता है।

स्कैलप को खोल समेत रखकर पकाओ तो इस तरह अंदर रस जमा हो जाता है। पहले जो मसल अलग करके सीधे तवे पर ग्रिल किया था उससे बिल्कुल अलग स्वाद — खोल वाली में रस बरक़रार रहता है तो ज़्यादा रसीली और मुलायम। छन-छन की आवाज़, ऊपर उठता धुआँ, आँखों से देखो, कानों से सुनो, नाक से सूँघो — इस तरह खाओ तो स्वाद दोगुना लगता है, सच में।
🔥 ख़ुद ग्रिल करके देखा तो ऐसा रहा
स्टाफ़ ने जो क्रम बताया उसके हिसाब से करो तो मुश्किल नहीं था। पहले एबलोन और स्कैलप, फिर चादोलबागी, आख़िर में सब्ज़ियाँ। एबलोन को कैंची से एक बाइट साइज़ में काटकर म्योंगी-नामुल पत्ती पर रखा, और मसल को पिघले चीज़ में डुबोकर खाया — इस दिन का बेस्ट कॉम्बो यही था।
लगभग सब ख़त्म होने पर तवे पर बचे तेल और सब्ज़ियों में चावल डालकर भून दिया — सीफ़ूड का रस और चादोलबागी का तेल चावल के दाने-दाने में समा गया और स्वाद कमाल का आया।
कई जगह खा चुका हूँ — सच्ची बात बताता हूँ
एक बात ईमानदारी से कहूँ तो कोरिया के समंदर किनारे सीफ़ूड कई जगहों पर खाया है, और ये जगह सबसे ज़बरदस्त थी — ऐसा कहना मुश्किल है। बुसान के जगालची मार्केट में वैरायटी कहीं ज़्यादा है, जेजू में एबलोन ज़्यादा बड़ा मिला था। अंदरूनी शहरों में भी इतनी ही क़ीमत में मिनी-कोर्स के साथ साशिमी देने वाली जगहें हैं। लेकिन टूरिस्ट स्पॉट होने को देखते हुए क्वालिटी ठीक-ठाक थी, और मात्रा उम्मीद से ज़्यादा। सबसे बड़ी बात — इस रेस्टोरेंट की असली वैल्यू खाने में नहीं, बल्कि समुद्र के ठीक सामने बैठकर खाने के उस माहौल में थी।

सिर्फ़ खाना नहीं — खिड़की से दिखता समुद्र भी
लेकिन इस रेस्टोरेंट की अच्छी बात सिर्फ़ खाना नहीं था। खिड़की वाली सीट पर बैठो तो बड़े काँच के पार सीधे समुद्र दिखता है। पतझड़ का मौसम था लेकिन सोचा था से ज़्यादा गर्मी थी, इसलिए बाहर टेरेस की बजाय अंदर खिड़की वाली सीट चुनी। ताड़ के पेड़ और पैरासोल वाला टेरेस भी था — अच्छे मौसम में बाहर बैठकर खाने का भी मज़ा आएगा।

हर टेबल पर ग्रिल तवा सेट था और टेबल-टू-टेबल दूरी भी अच्छी-ख़ासी थी, तो बग़ल वालों की चिंता किए बिना आराम से खा सकते हो। सीफ़ूड ग्रिल करते वक़्त धुआँ निकलता है तो इतनी दूरी ज़रूरी भी है।

समुद्र देखते हुए खाना — कोरिया का तटीय रेस्टोरेंट
बाहर निकलो तो ऐसा व्यू मिलता है। ठीक सामने बंदरगाह है और उसके पार टापू दिख रहे हैं। कोरिया के समंदर किनारे सीफ़ूड रेस्टोरेंट में इस तरह समुद्र देखते हुए खाने की सुविधा बहुत जगहों पर मिलती है — और एक ही खाना समुद्र के सामने बैठकर खाओ तो स्वाद अलग लगता है, ये तो हर देश में एक जैसा ही होगा।

रेस्टोरेंट के आगे ताड़ के पेड़ खड़े हैं, नक़ली घास वाले टेरेस पर पैरासोल और कुर्सियाँ लगी हैं। सीफ़ूड रेस्टोरेंट है लेकिन बाहर से देखो तो रिसॉर्ट जैसा लगता है। कोरिया के समंदर किनारे के रेस्टोरेंट आजकल बाहरी रंग-रूप पर काफ़ी ध्यान दे रहे हैं। पहले ज़्यादातर पुरानी-धुरानी मछली की दुकान जैसे लगते थे, अब तो बिल्कुल बदल गया है।

ये इमारत का बाहरी हिस्सा है। टेरेस की तरफ़ आओ तो सीधे सामने समुद्र, और रंग-बिरंगी कुर्सियाँ लगी हैं — खाने से पहले या बाद में यहाँ बैठकर समुद्र देखने वाले लोग भी काफ़ी थे।

ताड़ के पेड़ों के बीच से दिखने वाला समुद्र इतनी दूरी पर है। अच्छे मौसम में अंदर खाने से ज़्यादा बाहर खाने का मन करेगा, ऐसा व्यू है। फ़ोन से खींची फ़ोटो है तो क्वालिटी थोड़ी कम है, लेकिन माहौल का अंदाज़ा लग जाएगा।
कोरिया का समुद्री सीफ़ूड — दूर जाने की ज़रूरत नहीं
कोरिया के समंदर किनारे सीफ़ूड खाना — ये बस पेट भरने की बात नहीं है। सामने ज़िंदा एबलोन हिल-डुल रहा है, स्कैलप की मसल गोल्डन हो रही है, चादोलबागी का तेल स्प्राउट्स पर छन-छन बह रहा है — ये पूरी प्रक्रिया ही खाने का हिस्सा है। चॉपस्टिक उठाने से पहले ही पाँचों इंद्रियाँ भर चुकी होती हैं — मेरे हिसाब से कोरिया के समंदर किनारे रेस्टोरेंट का यही सच्चा आकर्षण है।
फिर से कह रहा हूँ — ये किसी ख़ास रेस्टोरेंट की सिफ़ारिश नहीं है। कोरिया के किसी भी तट पर जाओ, ऐसे शंख-सीपी ग्रिल रेस्टोरेंट आसानी से मिल जाएँगे। बुसान का हेउंडे, इंचियोन का योंगजोंगदो, गांगनुंग, पोहांग, टोंगयोंग, योसू, जेजू — जहाँ समुद्र है, वहाँ ये मिलेगा। अगर कोरिया घूमते हुए कभी समुद्र के पास से गुज़रो, तो एक शंख ग्रिल के बोर्ड वाली दुकान में ज़रूर जाकर देखना।
✈️ विदेशी यात्रियों के लिए ज़रूरी जानकारी
इस बार जो जांगजादो (Jangjado) गए थे, वो सियोल से गाड़ी से क़रीब 3 घंटे है, और वहाँ से सेमांगुम बाँध पार करके टापू के अंदर तक जाना होता है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट से गुन्सन शहर से 99 नंबर बस (हर 60 मिनट) लेनी पड़ती है और रेंटल कार के बिना आधा दिन सिर्फ़ आने-जाने में लग जाता है।
इसके मुक़ाबले बुसान का हेउंडे या इंचियोन का योंगजोंगदो सियोल से पब्लिक ट्रांसपोर्ट से 1-2 घंटे में पहुँच सकते हो, और स्टेशन के पास ही सीफ़ूड रेस्टोरेंट मिल जाते हैं — पहुँचना कहीं ज़्यादा आसान है। दूर तक जाने की ज़रूरत नहीं — कोरिया का समुद्री सीफ़ूड अनुभव क़रीब से भी पूरा मिल सकता है।
इस पोस्ट में विज़िट किए गए रेस्टोरेंट की जानकारी
नाम: जांगजादो नोउलबादा (Jangjado Noeulbada)
पता: 62, Jangjado 1-gil, Okdo-myeon, Gunsan-si, Jeollabuk-do, दक्षिण कोरिया
फ़ोन: +82-507-1430-5003
खुलने का समय: 11:00 – 21:00 (लास्ट ऑर्डर 20:20)
साप्ताहिक छुट्टी: हर बुधवार
Instagram: @jangjado_sunset_beach
Google Maps: नक़्शे पर देखें
मेन्यू
की-जोगे समहाप: 2 लोग ₹3,300 / 3 लोग ₹4,500 / 4 लोग ₹5,100
मिक्स साशिमी: 2 लोग ₹8,100
ताज़ी रॉकफ़िश स्पाइसी सूप: 2 लोग ₹3,000
सूखी कॉंगर ईल सूप: 2 लोग ₹3,000
क्लैम नूडल सूप (कालगुक्सू): ₹600
सीफ़ूड रामेन: ₹600
फ़्राइड राइस: ₹180
* मुलहोए (कोल्ड रॉ फ़िश सूप), होएदॉपबाप (रॉ फ़िश राइस बाउल), एबलोन पॉरिज जैसे अन्य आइटम भी उपलब्ध हैं
क़ीमतें और खुलने का समय बदल सकते हैं, जाने से पहले ख़ुद कन्फ़र्म कर लें।
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